जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन है और अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद स्थिति को सामान्य करने के हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं. जम्मू-कश्मीर में पिछले 45 दिनों से प्रतिबंध लगे हुए हैं. ऐसे में वहां चुनाव कब होंगे, इसका जवाब केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने दिया.

इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में जितेंद्र सिंह ने कहा, चुनाव आयोग ने परिसीमन का निर्देश जारी किया है, लिहाजा इस प्रक्रिया में वक्त लगेगा. लेकिन निकाय चुनाव की प्रक्रिया चुनाव आयोग ने शुरू कर दी है. उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव आयोग का अपना काम करने का तरीका है. गृह मंत्रालय से सुरक्षा की स्थिति की रिपोर्ट ली जाती है लेकिन पूरी स्थिति की समीक्षा चुनाव आयोग करता है.

यह जरूरी नहीं कि चुनाव आयोग को गृह मंत्रालय की दी हुई सूचना का पालन करना है पीएमओ में राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह ने इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में कश्मीर से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा की. जितेंद्र सिंह से जब पूछा गया कि लोग अनुच्छेद 370 हटाए जाने से खुश कैसे होंगे? उनके पास दूसरे लोगों से बात करने का साधन नहीं है. इंटरनेट नहीं है. इस पर उन्होंने कहा, 'इंसान की जिंदगी इंटरनेट बंद किए जाने से ज्यादा जरूरी है. यह सच है कि आज इंटरनेट एक जरूरत बन चुका है. बहुत हद तक यह एक लग्जरी भी है.

लेकिन एक इंसान की जिंदगी को बचाना सबसे जरूरी है, लग्जरी नहीं. लिहाजा सुरक्षा एजेंसियों के इनपुट के आधार पर जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं'.जितेंद्र सिंह ने कॉन्क्लेव में कहा कि वक्त और इतिहास बताएगा कि जो हमने कश्मीर के लिए किया वह राज्य के लोगों के लिए सही था. उन्होंने कहा कि कश्मीर में अब कोई प्रतिबंध नहीं है.

लोग खुद घर से बाहर नहीं निकल रहे हैं. इलाकों में कोई कर्फ्यू नहीं है. स्कूल खुले हैं और बच्चे जा रहे हैं. लेकिन वहां 100 प्रतिशत अटेंडेंस नहीं है.अनुच्छेद 370 पर सरकार के कदम पर उन्होंने कहा कि चीजें वैसी ही जा रही हैं, जैसे कश्मीरी चाहते थे.

गृह मंत्री अमित शाह रोकथाम संबंधी कदम उठाए जाने के दौरान काफी दयालु और उदार थे. उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि पूरे कश्मीर में प्रतिबंध नहीं लगा है. 200 पुलिस थाना क्षेत्रों में से सिर्फ एक दर्जन पुलिस थानों में प्रतिबंध है. बाकी हर जगह से प्रतिबंध हटाए जा चुके हैं और कोई कर्फ्यू नहीं  है.