लखनऊ। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) की परीक्षा में पास हुई नर्सों ने नियुक्ति की मांग को लेकर मंगलवार सुबह स्वास्थ्य भवन लखनऊ का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया। यूपी के विभिन्न जिलों से आई चयनित नर्सों ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। नर्सों ने आरोप लगाया कि विभाग के जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी सौतेला रवैया अपना रहे हैं। आरोप है कि इसी परीक्षा में उनके साथ पास हुई कुछ नर्सों को दो महीने पहले नियुक्ति दी जा चुकी है, लेकिन ज्यादातर नर्सों को अभी तक न्युक्ति नहीं मिली है। वह कार्यालय के चक्कर काट रहीं हैं और जिम्मेदार रोज नए नए बहाने बनाकर टालमटोल कर रहे हैं। प्रदर्शन कर रही नर्सों का कहना है कि चयन होने के बाद उन्होंने नौकरी भी छोड़ दी थी। अब वह नौकरी के लिए भटक रही हैं, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। नर्सों ने अपनी चार सूत्रीय मांगों को लेकर मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिला प्रशासन के अधिकारी को सौंपा है। प्रदर्शन कर रही नर्सों ने बताया कि लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित परीक्षा में पास हुए स्टाफ नर्स अभ्यर्थियों में कुछ की नियुक्ति चिकित्सा एवं शिक्षा स्वास्थ्य जवाहर भवन द्वारा अक्टूबर 2018 में ही कर दी गई, जबकि उनके साथ चयनित चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के स्टाफ नर्सों की नियुक्ति स्वास्थ्य भवन द्वारा अभी तक नहीं कराई गई है।स्टाफ नर्स लगातार स्वास्थ्य भवन के चक्कर काट रही हैं। लेकिन उनकी नियुक्ति में गाइडलाइन उपलब्ध होने का बहाना करके अधिकारी एवं कर्मचारियों द्वारा गुमराह किया जा रहा है।जब एक ही परीक्षा के एक ही विभाग में चयनित कुछ अभ्यर्थियों की नियुक्ति 2 माह पूर्व ही कर दी गई है, तो शेष अभ्यर्थियों की नियुक्ति के लिए गाइडलाइन की आवश्यकता क्यों? नियुक्ति के लिए चयनित सभी स्टाफ नर्सों ने मांग की है कि बिना किसी जनपद चुनाव के किसी भी जिले में शीघ्र नियुक्ति दिलाए जाने के बाबत महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं लखनऊ उत्तर प्रदेश को आदेश दिया जाए। गौरतलब है कि स्टाफ नर्स (महिला) की यूपीपीएससी लिखित परीक्षा 17 दिसंबर 2017 को आयोजित की गई थी। चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण उत्तर प्रदेश में स्टाफ नर्स के कुल 753 पद थे और इनमें से 558 पदों पर अंतिम चयन हुआ जबकि 195 पद रिक्त रह गए। परीक्षा 100 अंकों की थी। इसमें सामान्य एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए न्यूनतम अर्हता अंक 40 फीसदी और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अभ्यर्थियों के लिए न्यूनतम अर्हता अंक 30 फीसदी निर्धारित थे। ज्यादातर अभ्यर्थी न्यूनतम अर्हता अंक भी हासिल नहीं कर सके और उन्हें मेरिट से बाहर होना पड़ा। इसी वजह से स्टाफ नर्स 1993 पद खाली रह गए।