सिक्कों के लिए रॉ मटीरियल खरीदने में देरी से रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया को 10 रुपए के सिक्कों की अपनी डिमांड घटाकर आधी करनी पड़ी है। इससे सर्कुलेशन में सिक्कों की कमी आने का डर पैदा हो गया है। आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, केंद्र सरकार की टकसालों के 10 रुपए के सिक्के के ब्लॉक समय पर खरीदने में असफल रहने के कारण सिक्कों की सप्लाई पर नियंत्रण करने वाले रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2019 के लिए सिक्कों की अपनी पूरी योजना में बदलाव किया है।
कोलकाता, मुंबई, हैदराबाद और नोएडा में चार सरकारी टकसालों का कंट्रोल सिक्यॉरिटी प्रिंटिंग ऐंड मिंटिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एसपीएमसीआईएल) के पास है। एसपीएमसीआईएल ने 5 और 10 रुपए के सिक्कों के ब्लॉक खरीदने में देरी के कारण अगस्त में रिजर्व बैंक से सिक्कों के प्रॉडक्शन की योजना में बदलाव करने का निवेदन किया था।
इस मामले पर डिपार्टमेंट ऑफ इकनॉमिक अफेयर्स की इस महीने की शुरुआत में हुई प्रॉडक्शन प्लानिंग मीटिंग में चर्चा की गई थी। योजना के अनुसार, चार मिंटिंग यूनिट्स को 10 रुपए के सिक्के के 200 करोड़ पीस ढालने के लिए कहा गया है। पहले इसके 400 करोड़ पीस बनाने की योजना थी। सूत्रों ने बताया कि इस बदलाव से रिजर्व बैंक की सिक्कों के प्रबंधन की योजना पर असर पड़ सकता है। मिंटिंग यूनिट्स ने बढ़ी हुई डिमांड को पूरा करने के लिए अपने कर्मचारियों से 31 मार्च, 2019 तक सप्ताह में 44-48 घंटों के बजाय 54 घंटे कार्य करने के लिए कहा है। इसके लिए कर्मचारियों को ओवरटाइम और अन्य भत्ते दिए जाएंगे।