आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनाव 2019 के लिए सभी राजनीतिक पार्टियों ने अपनी-अपनी कमर कस ली है। पिछले दिनों आरएसएस के प्रमुख मोहन भागवत ने जहां राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तीन दिवसीय सम्मेलन में राम मंदिर और मुस्लिमों पर बयान देकर मिशन 2019 को साधने की कोशिश की वहीं कांग्रेस अब आरएसएस के डंडे का जबाव झंडे से देने की तैयारी में है। कांग्रेस अपने सेवा दल के कार्यकर्त्ताओं को अगले महीने विशेष प्रशिक्षण देने जा रहा है। आरएसएस का सामना करने के लिए कांग्रेस अब सेवा दल में विस्तार करने पर विचार कर रहा है।

यहां आपको बता दें कि सेवा दल की स्थापना 1923 में महाराष्ट्री ब्राह्मण डॉ. नारायण सुब्बाराव हार्डिकर ने की थी और उसके दो साल बाद 1925 महाराष्ट्री ब्राह्मण डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने आरएसएस की स्थापना की। आजादी के बाद सेवा दल समिट कर रह गया क्योंकि उसके बाद तब कोई लक्ष्य नहीं रहा था जबकि आरएसएस की शाखाएं आज देशभर के कई हिस्सों में हैं। आपको जानकार हैरानी होगी कि आरएसएस और सेवा दल के संस्थापक आपस में पहले दोस्त थे लेकिन विचार अलग होने पर उनके रास्ते भी अलग हो गए। 
ये काम करेगा सेवा दल

  • सेवा दल के कार्यकर्त्ता आगामी चुनावों में मोदी शासित राज्यों में सरकारों की विफलताओं को उजागर करेंगे।
  • ज्वलंत मुद्दे सहित पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतें और रुपए में गिरावट आदि को जनता तक लेकर जाएंगे।
  • साथ ही ये कार्यकर्त्ता मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, तेलंगाना और मिजोरम में होने जा रहे विधानसभा चुनावों और लोकसभा चुनाव 2019 को लेकर कांग्रेस के लिए ‘डोर टू डोर प्रचार करेंगे। 
  • कांग्रेस चाहती है कि सेवा दल के कार्यकर्त्ता मध्यप्रदेश और राजस्थान पर मेन फोकस रखें। इसी के चलते मध्य प्रदेश में 30 सीटों का चयन किया है जहां उनका दल ज्यादा सक्रिय है।