लखनऊ। बीएसपी अध्यक्ष मायावती ने शनिवार को पार्टी के राष्ट्रीय अधिवेशन में कई अहम फैसले लेते बड़े बदलाव किये हैं। इसके साथ ही मायावती ने अपने उत्तराधिकारी को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। मायावती ने साफ़ तौर पर कहा है कि वह खुद सक्रीय रहकर 20-22 साल तक पार्टी को आगे बढ़ाती रहने वाली है। इसलिए किसी को भी पार्टी के उत्तराधिकारी या अध्यक्ष बनने के सपने देखने छोड़ देने चाहिए। बता दें कि अब बसपा में जो भी राष्ट्रीय अध्यक्ष होगा। उसका कोई भी रिश्तेदार किसी विशेष पद पर नहीं रहेगा। वह साधारण कार्यकर्ता के तौर पर पार्टी की सेवा करेगा।
         शनिवार को पार्टी के राष्ट्रीय अधिवेशन में मायावती ने कहा कि अभी वह अगले लगभग 20-22 वर्षों तक खुद ही आगे और सक्रिय रहकर पार्टी की गतिविधियों को आगे बढ़ाती रहेंगी। अब ऐसे में अगले लगभग 20-22 वर्षों तक पार्टी में किसी को भी पार्टी का अध्यक्ष बनने का सपना नहीं देखना चाहिए और न ही किसी को अभी मेरा उत्तराधिकारी बनने का भी सपना देखना चाहिए।
        पार्टी के संविधान में बदलाव के बाद मायावती ने अपने भाई आनंद कुमार को बसपा के उपाध्यक्ष पद से हटा दिया है। आनंद कुमार को उपाध्यक्ष बनाए जाने के पीछे वजह बताते हुए बीएसपी अध्यक्ष ने कहा कि ‘लोकसभा चुनाव के बाद पार्टी के कामकाज को देखने के लिए आनंद कुमार को उपाध्यक्ष बनाया था।
        मायावती ने अपने पार्टी पर परिवारवाद का आरोप लगने की बात का जिक्र करते हुए कहा कि वे खुद को भी मिलाकर और उनके बाद अब आगे भी बीएसपी का जो भी ‘राष्ट्रीय अध्यक्ष’ बनाया जायेगा, तो फिर उसके जीते-जी व ना रहने के बाद भी उसके परिवार के किसी भी नजदीकी सदस्य को पार्टी संगठन में किसी भी स्तर के पद पर नहीं रखा जाएगा। यानी उनके परिवार के सदस्य बिना किसी पद पर बने रहकर और एक साधारण कार्यकर्ता के रूप में ही केवल अपनी निःस्वार्थ भावना के साथ ही पार्टी में कार्य कर सकते है।
        बीएसपी अध्यक्ष ने आगे कहा कि ‘इसके अलावा पार्टी अध्यक्ष के परिवार के किसी भी नजदीकी सदस्य को ना कोई चुनाव लड़ाया जाएगा। ना ही उसे कोई राज्यसभा सांसद, एमएलसी, मंत्री और राजनैतिक उच्च पद पर रखा जाएगा। लेकिन पार्टी में राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद को छोड़कर बाकी अन्य सभी स्तर के पदाधिकारियों के परिवार के लोगों पर ‘विशेष परिस्थितियों में’ यह सब शर्तें लागू नहीं होगी।
       वहीं अपने भाई को उपाध्यक्ष पद से हटाये जाने के पीछे की वजह बताते हुए कहा कि उनकी पार्टी के भीतर भी कांग्रेस की तरह परिवारवाद की चर्चा शुरू हो गई थी। लोगों ने उनके भाई आनंद कुमार की तर्ज पर अपने नाते रिश्तेदारों को रखने की सिफारिश शुरू कर दी थी. उन्होंने कहा कि कई सिफारिश तो सीधे उनके तक पहुंचने लगी थी। ऐसे में पार्टी को मूवमेंट से डिगता देख आनंद ने खुद ही पद छोड़ने की इच्छा जताई जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया और अब वह राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नहीं रहेंगे।
         वहीं इस दौरान मायावती ने गठबंधन पर दो टूक कहा है कि उनकी पार्टी किसी भी राज्य में और किसी भी चुनाव में किसी पार्टी के साथ केवल ‘सम्मानजनक’ सीटें मिलने पर ही कोई चुनावी गठबन्धन करेगी। पार्टी किसी भी राज्य में और किसी भी चुनाव में किसी भी पार्टी के साथ केवल सम्मानजनक सीटें मिलने पर ही वहां उस पार्टी के साथ कोई चुनावी गठबंधन करेगी। नहीं तो उनकी पार्टी अकेली ही चुनाव लड़ना ज्यादा बेहतर समझती है।